Tuesday, 3 February 2015

भ्रष्टाचारी या भिखारी ??

घूस ली और दी नहीं, किया न भ्रष्टाचार
ऐसे घोंचू कर्मचारी को हज़ार बार धिक्कार।
हज़ार बार धिक्कार, व्यर्थ है वह कर्मचारी
काम करते समय, जिसने ना डंडी मारी।
क्या किसी प्रोजेक्ट पे, काम पायेगा ऐसा बंदा ?
जिसने ऊपरवाले को, ना पहुंचाया चंदा।
ना पहुंचाया चंदा, व्यर्थ है वह अत्याचारी
अगले प्रोजेक्ट की जिसने ना की तेयारी।
जीवन भर देते रहो, भरे ना इनका पेट
गिफ्ट हमेशा देते रहो, जब भी हो इनसे भेंट।
जब भी हो इनसे भेंट, व्यर्थ है वह अधिकारी
कार्य करने के समय जिसने ना छुट्टी मारी।
दिनभर कुछ करो नहीं, बेठो हमेशा लेट
घाटा चाहे होता रहे , करो ना तनिक संकोच
करो ना तनिक संकोच, व्यर्थ है वह ब्रह्मचारी
तुमने रिस्वत ली नहीं, जीव हो कैसे तुम सरकारी।
जो था पहले जेबों में, अब खातों में रहता है।
आधुनिक लोकतन्त्र में, हर कोई है भ्रष्टाचारी
हर कोई है भ्रष्टाचारी, व्यर्थ है वह धर्माधिकारी
यही वह कर्म है, जिसमे है ईमानदारी।
रिश्वत गर दोगे नहीं, रहोगे हमेशा तंग
समझोता गर करलो, बन जाओगे दबंग,
बन जाओगे दबंग,  व्यर्थ है वह नर हो या नारी
सिस्टम से लड़ने की, जिसने ली जिम्मेवारी ।  
“ रिश्वत दोगे ओर लोगे नहीं, करलो ऐसा प्रण
उखाड़ फेंको भ्रष्टाचार को, जो है सबसे बड़ी बीमारी
जो है सबसे बड़ी बीमारी, व्यर्थ है वह शिष्ठाचारी
जो भी इसमे लिप्त है, कहलाएगा भिखारी” 

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